वैज्ञानिक प्रगति ने निरन्तर नयी विधियों और माध्यमों का विकास किया । पहले टेलीग्राफ , टेलीफोन व बेतार रेडियो और अब टेलीविजन , फैक्स , ई - मेल , सुपर कम्प्यूटर , रेडियो पेजर , सेलुलर फोन , वीडियो टेलीफोन आदि ने संचार - जगत में नयी क्रान्ति का सूत्रपात किया है । बड़े पैमाने पर सूचना का संरक्षण , पुनप्ति , सम्प्रेषण तथा पुर्नव्यवस्था को सूचना - क्रान्ति कहते हैं । सूचना - क्रान्ति की शुरूआत अमेरिका से हुई । वैसे भारत में संचार की विकास यात्रा कभी धीमी कभी तेज रही है । रफ्तार की दृष्टि से 90 का दशक अत्यंत ही तीव्र माना गया है । इसलिए इसे संचार - क्रान्ति का युग कहा जा रहा है । 17 वीं शती एवं 18 वीं शती जहाँ साम्राज्यवादी शासन प्रणाली की साक्षी रही है वहीं 19 वीं शती में औद्योगीकरण का बोलबाला रहा है । समय के साथ परिवर्तन हुआ , नवीन अविष्कार हुए , जिन्होंने सूचना क्रान्ति के मार्ग को प्रशस्त किया । यह भविष्य के लिए प्रगति का पथ है । 21 वी शती सूचना क्रान्ति की शती है । आज कम्प्यूटर , ई - मेल , ई - कामर्स , इन्टरनेट , साइबर सेन्टर आदि का जमाना है । भारत के दरवाजे पर भी इसकी दस्तक सुनी जा सकती है । सबको सूचना देने के अधिकार के बारे में बने मैकब्राइट अंतर्राष्ट्रीय आयोग ने कहा कि कोई भी देश तब तक स्वतंत्र नहीं हो सकता , जब तक वह संचार माध्यमों के मामले में आत्मनिर्भर नहीं हो जाता है । ' जहाँ सूचना प्रौद्योगिकी ने मानव जीवन को सुलभ बनाया है वहीं दूसरी ओर इसमें पश्चिमी संस्कृति के स्वदेशी संस्कृति पर हो रहे हमलों से चिन्ता बढ़ती जा रही है । इससे स्वदेशी संस्कृति की अस्मिता खतरे में पड़ती नजर आ रही है । सूचना क्रान्ति से तात्पर्य संचार के उन अधुनातन साधनों से है जो न सिर्फ तीव्र गति में एक स्थान से दूसरे स्थान पर विभिन्न जानकारियों को पहुंचाते हैं बल्कि ज्ञान के पट को खोलते हैं । इसका सर्वप्रथम वाहक कम्प्यूटर है , जिसने तीव्र गति से विकास के नये आयाम खोले हैं । घर बैठे लोग इसके माध्यम से सूचनाओं का आदान - प्रदान करते ही हैं । मानव 1937 में पहली बार कम्प्यूटर मार्क- I बनाने में सफल हुआ । भारत आज सॉफ्टवेयर के निर्माण के क्षेत्र में बहुत आगे हैं । सुपर कम्प्यूटर के निर्माण के क्षेत्र में भारत , अमेरिका और चीन के नजदीक पहुँच चुका है । दूर संचार के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तनों का एक प्रमुख आधार ' ऑप्टिकल फाइबर ' भी है । बाल के समान पतले सिलिका से बने ये ऑप्टिकल फाइबर भीतर से खोखले होते हैं , जिनमें पूर्णआन्तरिक परावर्तन के सिद्धान्त पर शक्तिशाली प्रकाश भेजा जाता है । ऑप्टिकल फाइबर के एक तार से एक साथ 40 हजार टेलिफोन लाइन और 20 दूरदर्शन कार्यक्रम चलाये जा सकते है । भारत में | ऑप्टिकल फाइबर का निर्माण इलाहाबाद ( नैनी ) में स्थित ' हिन्दुस्तान | केबल्स लिमिटेड ' और भोपाल में स्थित ' आप्टिकल टेली | कम्युनिकेशन्स लिमिटेड ' द्वारा होता है । सम्प्रति सम्पूर्ण विश्व इण्टरनेट के तहत एक वैश्विक गाँव में परिवर्तित हो गया है । इन्टरनेशनल नेटवर्क का संक्षिप्त नाम ही इन्टर नेट है । भारत में पहली विश्वस्तरीय आँकड़ा सूचना सेवा जनवरी , 1955 इन्टरनेट के रूप में शुरू की गई । दूर संचार के क्षेत्र में | सेलुलर फोन का आगमन एक उल्लेखनीय उपलब्धि है । यह दूरसंचार | की एक विकसित प्रणाली है , जो यात्रा के दौरान भी टेलीफोन की सुविधा उपलब्ध कराती है । यह चलता - फिरता फोन है जो रेडियो | तकनीक पर आधारित है । सेलुलर फोन और साधारण फोन में अंतर | यही है कि सेलुलर फोन में संदेशों का सम्प्रेषण जहां रेडियो तरंगों के | माध्यम से होता है , वही साधारण टेलीफोन से भेजे व ग्रहण किये जाने वाले संदेश तारों के जरिये आते जाते हैं । इसका उपयोग चलते | हुए वाहनों से भी किया जा सकता है । जहां तक रेडियो पेजिंग प्रणाली का प्रश्न है , यह भी रेडियो | तकनीक पर आधारित होती है , किन्तु इसकी व्यवस्था में एक मार्गी चयनित संकेतन का प्रावधान होता है जो भी व्यक्ति रेडियो पेजिंग के | उपभोक्ता को संदेश देना चाहता है उसे सबसे पहले प्रवेश नम्बर और | उसके तुरन्त बाद उपभोक्ता विशेष को प्रदत्त पेजिंग नम्बर डायल करना पड़ता है । तदुपरानत नियंत्रण टर्मिनल कॉल लगाने के लिए कार्यवाही करता है और ट्रांसमीटर के माध्यम से पेजिंग नम्बर के लिए आह्वान सुर भेजता है । अनन्तर पेजिंग रिसीवर सुर पकड़कर ' बीप - बीप ' का | संकेत देता है । तत्पश्चात् पेजिंग रिसीवर धारक अर्थात् उपभोक्ता को सूचना या चेतावनी मिलती है और वह आवश्यकतानुसार आगे की कार्यवाही करता है । रेडियो पेजिंग वसतुतः एक चलती फिरती वायरलैस प्रणाली है । भारत में सूचना क्रान्ति की स्थापना कर्नाटक की राजधानी बंगलौर में 24 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में पाँच अरब रुपये की लागत से की गई है । इस संयुक्त क्षेत्र की कम्पनी में टाटा समूह और सिंगापुर कन्सोर्टियम की 40-50 प्रतिशत अंश पूँजी तथा कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास की 20 प्रतिशत की अंश पूँजी होगी । इसविश्वस्तरीय पार्क में इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टेवयर उद्योगों के लिए अन्तरराष्ट्रीय स्तर की अत्याधुनिक संरचनात्मक सुविधाएँ उपलब्ध होंगी । इस पार्क में शोरूम , लघु भण्डार गृह , कारिट कार्यालय , अनुसंधान और उच्च प्रौद्योगिकी उत्पादन सुविधाएँ , रेस्टोरेण्ट तथा मनोरंजन की सुविधाएँ उपलब्ध होगी । निश्चित रूप से सूचना और प्रौद्योगिकी क्रांति ने भारत को विशेष लाभदायक अवसर प्रदान किये हैं । पूँजी और संसाधनों की कमी के बावजूद भारत के पास ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को विकसित करने का सर्वोत्तम समय है । निश्चय ही आज की दुनिया की निगाहें भारतीय प्रतिभाओं पर है । जहाँ इन सुविधाओं के अपार लाभ एवं सम्भावनाएँ है वहीं इसके विपरीत प्रभावों एवं सीमाओं को नकारा नहीं जा सकता । विगत सदी की समाप्ति पर वाई टेक समस्या से आज कोई भी अनभिज्ञ नहीं है । तीसरी दुनिया के वाशिंदे अधिकांशतया अभावों से पीड़ित है , जहाँ खाने के लिए रोटी एवं तन ढकने के लिए केपड़ा उपलब्ध नहीं है उसके लिए कम्प्यूटर जैसी महंगी वस्तुओं के क्रय करने की सम्भावना भी दिवास्वप्न से अधिक कुछ नहीं है । ध्यातव्य हो कि सूचना प्रौद्योगिकी का अभी तक जो भी लाभ उठाया गया है वह उच्च वर्ग तक सीमित है । गरीब लोगों को तो यह भी पता नहीं कि आई टी आखिर किस चिड़िया का नाम है ? हाल ही में जिस तरह नासडाक में आईटी शेयरों का मूल्य गिरा है , उससे इसकी सीमायें उजागर कर दी हैं । जब विकास के प्रारम्भिक चरण मेंही यह स्थिति है तो आगे क्या होगी इसकी कल्पना सहज ही की जा सकती है । बीमा , बैकिंग , शेयर दलाली , वित्तीय सलाह , कानूनी सलाह वकालत , मेडिकल आदि क्षेत्रों में ' ई - कॉमर्स ' पर असामाजिक से लेकर अध्यात्मिक तक हर तरह का माल बेचा जा रहा है । इस तरह एक तरफ तो ब्रेक व्यापार हो रहा है तो दूसरी तरफ धर्म परिवर्तन कराने वाले देश इसे अपना हथियार बनाने लगे हैं । सूचना क्रान्ति का एक अन्य पहलू यह भी है कि भारत जैसे गरीब राष्ट्र में इसका पूरे देश में प्रचार प्रसार करना संभव नहीं है । भारत में यह तकनीक कुछ वर्गों तक ही सीमित रह जायेगी । परिणामस्वरूप सामाजिक विषमता में वृद्धि होगी । सूचना क्रान्ति क्षेत्रीय विषमताओं को भी जन्म दे रही है क्योंकि यह प्रौद्योगिकी कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित है । आधुनिक संचार उद्योग पर धनी देशों और बहुराष्ट्रीय निगमों का कब्जा है । दुनिया के 80 फीसदी से ज्यादा समाचार पश्चिमी देशों के नियंत्रण वाली चार एजेंसियां , एपी , यूपीआई , रायटर और एएफपी देती हैं । अपने राष्ट्रीय हितों के साधने के अलावा ये एजेंसियां पूरी दुनिया में पश्चिमी मूल्यों और विचारों को ले जाती हैं । यदि हम समय के साथ चलते हुए इसके नकारात्मक पहलुओं से करते अपने सूचनातंत्र को निष्पक्ष व परिष्कृत कर जनता के बीच उसकी श्रेष्ठतम रूप में स्थापित कर सकें तो निःसन्देह राष्ट्र व समाज का उत्थान ही होगा ।
यह जरूरी नहीं कि हम दंड के माध्यम से ही किसी समस्या का समाधान करें हां लेकिन यह कुछ हद तक हम ऐसा कर सकते हैं । बच्चे का दिमाग बचपना अवस्था में बहुत कोमल होता है। हमें दंड देते समय वह सारा प्रयास करना चाहिए कि बच्चे डरे नहीं, बल्कि उसे समझे क्योंकि डर बच्चे को कमजोर बना सकती है।घर में माता पिता और स्कूलों में अध्यापकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए।हमें समझना चाहिए कि यदि कोई बालक किसी भी प्रकार की गलती करता है तो वह उसकी उम्र है और इस उम्र में बच्चे ऐसा करते हैं और जब वह ऐसा करें तो हमें उन्हें प्रेम से समझाना चाहिए और उन्हें बताना चाहिए कि यह अमुक वस्तु आपने तोड़ दिया है सोचिए फिर आप कैसे खेलेंगे तो कल खेलना है नहीं तो मैं दूसरी ला दूंगा लेकिन इसे दोबारा मत तोड़ना, कहने का अर्थ बच्चे को ज्यादातर उसकी गलती पर समझाएं और इस तरह समझाए कि उसे यह न लगे कि आप उस पर नाराज है या गुस्से में समझा रहे हैं।इस तरह से वह समझेगा भी और उसके बुद्धि का विकास भी होगा और आने वाले जीवन में भी वह बहुत सी समस्याओं का समाधान स्वयं कर सकेगा और हम एबी जानते हैं कि संसार में सुख कम और दुख ज्यादा है तो...
Comments
Post a Comment