एसी अभिकल्पना की जा रही है कि जैसे-जैसे विश्व व्यापार संगठन के देशों के बीच कृषि बाजार खुलते और स्वतंत्र होते जा रहे हैं वैसे वैसे कृषि क्षेत्र में किसानों की आर्थिक संभावनाएं बढ़ती जा रही है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर या भी माना जा रहा है कि कृषि प्रधान देशों में कृषि उत्पादों के विपणन की बाधाएं दूर कर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत की जा रही है और उपभोक्ताओं के लिए बेहतर विकल्प दल कराए जा सकते है। इस संदर्भ में भारत के लिए यह बात अति महत्वपूर्ण है कि नए प्रमुख खाद्य आयातक देश से अब वह एक कृषि निर्यातक देश बनता जा रहा है भारत कृषि प्रधान एवं गांव का देश है यहां देश की तीन चौथाई जनसंख्या निवास करती है जो कृषि पर निर्भर है कविवर सुमित्रानंदन पंत हो के शब्दों में तिनकों को हरे- हरे तन पर , हिल, हरित रुधिर है रहा झलक। श्यामल भूतल पर झुका हुआ, नभ का चीर निर्मल नील फलक। वास्तव में ग्रामीण छटा का सौंदर्य अद्भुत होता है ऐसा लगता है कि यहां कि पृथ्वी रूपी नायिका हरी-भरी पुष्पा अंकित साड़ी पहनने का स्त्रियों के रूप में रोमांचित ऑस्कर स्वेद बिंदु युक्त हो अपने गगन रूपी प्रियतम से ...